Showing posts with label hindi. Show all posts
Showing posts with label hindi. Show all posts

Monday, April 08, 2013

कि कल कोई ये न कहे... So tomorrow no one says...


देख लेने दो आज इस दुनिया को मुझे जी भरके,
कि कल जहाँ ये न कहे कि मैं यहाँ से गुज़रा न था.

बरस जाने दो आज इस बारिश को मुझपर जी भरके,
कि कल कोई बूँद ये न कहे कि मैं उसमें भीगा न था.

चल लेने दो आज मुझे इस हसीं ज़मीन पर जी भरके,
कि कल मिट्टी ये न कहे कि मैंने उसे छुआ न था.

भर लेने दो आज आसमां को आँखों में मेरी जी भरके, 
कि कल फलक ये न कहे कि मैं उसमें खोया न था.

ले लेने दो आज मुझे साँसें जी भरके,
कि कल पवन ये न कहे कि मैंने उसे महसूस किया न था.

जल जाने दो आज मुझे इस आग में जी भरके,
कि कल कोई लौ ये न कहे कि मैं उसमें समाया न था.

जी लेने दो आज मुझे हर पल को जी भरके,
कि कल कोई लम्हा ये न कहे कि मैंने उसमें ज़िंदा न था.

गा लेने दो आज हर गीत मुझे जी भरके,
कि कल कोई अलफ़ाज़ ये न कहे कि मैंने उसे गुनगुनाया न था 

English Translation

Let the world see me today to its satisfaction,
So tomorrow no one says I didn’t visit this place.

Let it rain on me today,
so tomorrow no drops says that I didn’t get wet in it.

Let me walk today on this beautiful earth,
So tomorrow it doesn’t say that I didn’t touch it.

Let me fill the sky today in my eyes,
So tomorrow it doesn’t say that I didn’t make it my mirror.

Let me breathe deeply today to my contentment,
So tomorrow the air doesn’t say that I didn’t soak in it.

Let me burn today in this fire,
So tomorrow the flames won’t say that I didn’t embrace them.

Let me live every moment today,
So tomorrow no moment says that I didn’t find life in it.

Let me sing a song today
So tomorrow no word would say that I didn't hum it. 

Friday, December 02, 2011

मंज़िल

तन्हाई मेरा पेहला प्यार भी है 
और मेरा पेहला डर भी.
तुझसे जुदाई मेरी पेहली तमन्ना भी है 
और आखरी आरज़ू भी. 

तेरे बिना ही सबकुछ हूँ मैं 
पर तेरे बिना कुछ भी नहीं. 
किस सच को चुनना है मुझे 
इस बात से बेख़बर भी नहीं. 

तू मेरी मंज़िल नहीं 
ये पता है मुझे, 
फिर क्यों बार बार 
तू ऐसे सताए मुझे?

मेरी मंज़िल इसी पल में है 
पर मुकाम है मीलों दूर भी.
इस पल में और सब कुछ है 
काश होती थोड़ी ज़िन्दगी भी. 

जीना था मुझे खुलके 
जब तूने जकड़े रखा था,
अब जब कोई पकड़ नहीं 
तो क्यों जी नहीं पा रहा? 

ऐ खुदा मुझे ये बता 
क्यों बनाया मुझे तूने ऐसा? 
जो है उसे छोड़कर क्यों 
जो नहीं उसके पीछे मैं प्यासा? 

Saturday, September 03, 2011

सोच


सोच रहा हूँ की ये क्या सोच रहा हूँ मैं,
सोच सोच कर ये क्या खोज रहा हूँ मैं? 
सोच में इतना कैसे डूब गया?
की मैं सोच नहीं ये भी भूल गया. 

भीड़ में अकेला करती है सोच, 
और तन्हाई में भीड़ को चाहती भी. 
जो है पास उससे दूर करती है सोच,
और दूरी को नजदीकियां बनाती भी. 

मुझको मुझसे छुपाती है सोच,
और मुझे तुमसे मिलाती भी. 
मेरे अधूरेपन का एहसास है सोच, 
और वही तुमसे प्यार जताती भी. 

मेरे हर डर का जज़्बात है सोच,
और हिम्मत की हर आस भी. 
कभी पल से ज़िन्दगी छिनती है सोच,
और कभी ज़िन्दगी में पल भरती भी.  

साँसों में साँसें उलझाती है सोच, 
और कभी मुश्किलें सुलझाती भी. 
जीने की वो हर आरज़ू है सोच,
और मरने की हर तमन्ना भी. 

मेरे बचपन की वो यादें है सोच,
और बुढ़ापे की लाठी भी.  
मेरा कल, आज और कल है सोच,
पर मुझे बनाती और मिटाती भी. 

सोच नहीं तो क्या हूँ मैं? 
इस बात से अंजान हूँ मैं.
सोच नहीं तो मेरा अस्तित्व क्या है? 
सोच नहीं तो मेरी परिभाषा क्या है? 

मेरे जीवन की कहानी है ये सोच, 
घटना नहीं पर मेरा अनुवाद है सोच, 
मुझे मुझमें उलझाए रखना है इसको 
कुछ और ना सही, एक नशा है सोच.